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Jyeshtha Purnima Celebration: भक्ति और उल्लास का संगम, ज्येष्ठ पूर्णिमा पर दिव्य बना वैदिक प्रभात आश्रम

ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर बलिया स्थित 'वैदिक प्रभात आश्रम, नया चौक' में 'भव्य फूल बंगला' और 'नौका विहार उत्सव' का भक्तिमय आयोजन किया गया।

Jyeshtha Purnima Celebration

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 9, 2026

Jyeshtha Purnima Celebration: पूर्णिमा का दिन सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र और कल्याणकारी माना गया है। इस पावन अवसर पर बलिया के नया चौक स्थित ‘वैदिक प्रभात आश्रम’ में भक्ति, श्रद्धा और उल्लास का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। ‘द वैदिक फाउंडेशन’ के संस्थापक और परम श्रद्धेय महाराज श्री स्वामी बद्री विशाल जी के पावन सानिध्य में आयोजित इस भव्य उत्सव ने न केवल आश्रम परिसर, बल्कि समस्त क्षेत्र को कृष्ण-भक्ति के रस से सराबोर कर दिया।

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‘फूल बंगला’ : साक्षात वैकुंठ का अनुभव

उत्सव का मुख्य आकर्षण भगवान का ‘फूल बंगला’ था। आश्रम के गर्भगृह को देश के विभिन्न हिस्सों से मंगवाए गए सुगंधित और रंग-बिरंगे फूलों से इस प्रकार सजाया गया था कि श्रद्धालुओं को साक्षात वैकुंठ लोक का आभास हो रहा था। फूलों की कोमलता और उनकी भीनी-भीनी सुगंध ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया था। भक्तगण अपने आराध्य के इस अनुपम श्रृंगार को निहारकर अभिभूत हो रहे थे। स्वामी बद्री विशाल जी की प्रेरणा से की गई यह अलौकिक सजावट भक्तों के चित्त को एकाग्र करने वाली और मन को शांति प्रदान करने वाली थी।

नौका विहार : भक्ति की लहरों पर प्रभु का अवतरण

फूल बंगला के भव्य दर्शन के बाद, आश्रम में ‘नौका विहार उत्सव’ का आयोजन किया गया। भक्ति की गंगा में गोता लगाते हुए भक्तों ने भगवान की प्रतिमा को दिव्य नौका पर विराजमान किया। सजे-धजे नौका में प्रभु के दर्शन करना भक्तों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव रहा। इस दौरान पूरा आश्रम परिसर प्रभु के जयकारों और संकीर्तन से गूंज उठा। स्वामी जी के मार्गदर्शन में आयोजित इस नौका विहार ने भक्तों को यह संदेश दिया कि जीवन की नौका यदि प्रभु के हाथों में हो, तो संसार रूपी सागर को पार करना अत्यंत सुगम हो जाता है।

पद गायन और कीर्तन से रिझाए प्रभु

उत्सव की सार्थकता भक्तों के हृदय से निकले भावों और कीर्तन में निहित थी। स्वामी बद्री विशाल जी के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने पारंपरिक पद गायन और मधुर भजनों के माध्यम से भगवान को रिझाने का प्रयास किया। ‘अच्युतम केशवम’ और ‘राधे-कृष्ण’ के संकीर्तन से आश्रम का कोना-कोना गुंजायमान हो उठा। भक्तों ने अपने लाडले प्रभु को खूब लाड लड़ाया और प्रेममयी भावों से उन्हें समर्पित किया। इस अवसर पर प्रत्येक भक्त के चेहरे पर एक अलग ही ‘मुखोल्लास’ (आनंदित मुख) दिखाई दे रहा था। स्वामी जी के ओजस्वी प्रवचनों ने भक्तों में भक्ति की नई ऊर्जा का संचार किया।

सामूहिक सेवा और एकता का भाव

वैदिक प्रभात आश्रम के सभी पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों ने इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में सराहनीय भूमिका निभाई। सभी भक्तों ने मिलजुलकर व्यवस्था संभाली और एक सूत्र में बंधकर सेवा कार्य किए। यह आयोजन न केवल धार्मिक परंपराओं के निर्वहन का माध्यम बना, बल्कि इसने समाज में भाईचारे और सामूहिक एकता का सुंदर संदेश भी दिया।

ज्येष्ठ पूर्णिमा की वह रात भक्ति की मिठास और आनंद का एक ऐसा अध्याय बन गई, जिसे भक्त लंबे समय तक याद रखेंगे। स्वामी बद्री विशाल जी के आशीर्वाद से संपन्न यह उत्सव यह सिद्ध करता है कि निष्काम भक्ति और प्रेम ही प्रभु को रिझाने का एकमात्र मार्ग है। अंत में, प्रसाद वितरण के साथ ही यह भव्य आयोजन संपन्न हुआ और भक्त प्रभु के मंगलमय आशीर्वाद के साथ अपने घरों को लौटे।

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