Haryana News: हरियाणा में भ्रष्टाचार और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग को लेकर राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है। इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय सिंह चौटाला ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखकर भाजपा सरकार के कार्यकाल में सामने आए विभिन्न कथित घोटालों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जांच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के किसी मौजूदा न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित स्वतंत्र समिति से कराई जानी चाहिए।
अभय चौटाला ने लगाया आरोप
अभय चौटाला ने पत्र में आरोप लगाया कि प्रदेश में सरकारी धन के इस्तेमाल, खरीद प्रक्रियाओं, ठेकों के आवंटन और सरकारी भर्तियों में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। उनका कहना है कि सरकार की जिम्मेदारी जनता को पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन देना है, लेकिन हरियाणा में कथित भ्रष्टाचार के मामलों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
इनेलो नेता ने अपने पत्र में कई मामलों का उल्लेख किया है। इनमें धान और गेहूं खरीद में कथित गड़बड़ी, शराब और रजिस्ट्री घोटाला, पेपर लीक, अवैध खनन, निजी बैंकों में सरकारी धन के अनुचित इस्तेमाल, छात्रवृत्ति घोटाले तथा नगर निगमों और नगरपालिकाओं में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप शामिल हैं।
चौटाला ने दावा किया कि इन मामलों में छोटे अधिकारियों या कर्मचारियों पर कार्रवाई कर खानापूर्ति की गई, जबकि कथित रूप से जिम्मेदार बड़े और प्रभावशाली लोग अब भी कानून की पकड़ से बाहर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि निष्पक्ष जांच नहीं होने के कारण भ्रष्टाचार में शामिल कथित “बड़े मगरमच्छ” खुले घूम रहे हैं।
अपने आरोपों के समर्थन में अभय चौटाला ने भाजपा नेताओं और मंत्रियों के पुराने बयानों का भी हवाला दिया। उन्होंने फरीदाबाद नगर निगम से जुड़ी एक बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने अधिकारियों के सामने कथित रूप से हजारों करोड़ रुपये के घोटाले की बात कही थी।
इसके साथ ही उन्होंने पूर्व गृहमंत्री अनिल विज द्वारा श्रम विभाग में कथित 1500 करोड़ रुपये की अनियमितताओं का मुद्दा उठाए जाने का भी उल्लेख किया। चौटाला ने कहा कि उन्होंने 27 जुलाई 2020 को तत्कालीन मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर नौ कथित घोटालों की सूची दी थी, लेकिन उन मामलों पर भी अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
अभय चौटाला ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से कहा कि अगर सरकार वास्तव में पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त शासन का दावा करती है तो उसे स्वतंत्र जांच से पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्होंने मांग की कि हाईकोर्ट के सिटिंग जज की अध्यक्षता में जांच समिति गठित कर सभी मामलों की निश्चित समय सीमा के भीतर जांच पूरी कराई जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि जांच में जो व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके पद या राजनीतिक प्रभाव की परवाह किए बिना उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और कानूनी कार्रवाई की जाए। चौटाला के पत्र के बाद प्रदेश में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।







