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Haryana News: आगजनी केस में डेरा समर्थकों को राहत, हाई कोर्ट ने बरकरार रखा फैसला

पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के समर्थकों को बड़ी राहत देते हुए साल 2017 के कलायत हिंसा और आगजनी मामले में बरी करने के फैसले को बरकरार रखा है।

Haryana News

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 14, 2026

Haryana News: पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के अनुयायियों को एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी मामले में बड़ी राहत दी है। अदालत ने अगस्त 2017 की हिंसा और आगजनी से जुड़े मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा डेरा समर्थकों को बरी किए जाने के आदेश को पूरी तरह सही माना है। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने निचली अदालत के इस निर्णय के खिलाफ दायर की गई हरियाणा सरकार की अपील को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

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जानिए क्या था पूरा मामला?

यह पूरा विवाद अगस्त 2017 का है, जब साध्वी यौन शोषण मामले में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को पंचकूला की सीबीआई कोर्ट द्वारा दोषी करार दिया गया था। इसके बाद हरियाणा के कई हिस्सों में अचानक भारी हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं भड़क उठी थीं।

अभियोजन पक्ष (Prosecution) के अनुसार

हिंसक भीड़ का हमला: 25 अगस्त 2017 को लाठी-डंडों, हथियारों और खतरनाक पेट्रोल बमों से लैस डेरा समर्थकों की एक उग्र भीड़ ने कैथल जिले के कलायत में स्थित ‘उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम’ (UHBVN) के कार्यालय पर हमला बोल दिया था।

आगजनी और सरकारी संपत्ति को नुकसान: आरोप था कि इस उपद्रवी भीड़ ने न केवल सरकारी दफ्तर में जमकर तोड़फोड़ की, बल्कि पूरे दफ्तर को आग के हवाले भी कर दिया।

सख्त धाराओं में मुकदमा: इस गंभीर घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ देशद्रोह (Sedition), दंगा भड़काने, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी बेहद सख्त और गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था।

हाई कोर्ट ने जांच की गंभीर खामियों को किया उजागर

इस मामले पर सुनवाई करते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के जस्टिस विनोद भारद्वाज और जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ (डिवीजन बेंच) ने हरियाणा सरकार की दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने साल 2019 में निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) द्वारा दिए गए बरी करने के आदेश को बिल्कुल सही और न्यायसंगत ठहराया।

हाई कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया कि कानून में सिर्फ संदेह या अनुमान के आधार पर किसी भी व्यक्ति को अपराधी नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने माना कि सरकारी पक्ष (Prosecution) आरोपियों पर मढ़े गए संगीन आरोपों को अदालत के सामने कानूनी रूप से साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा है।

अदालत द्वारा रेखांकित की गईं जांच की मुख्य विसंगतियां

हाई कोर्ट ने मामले की जांच और अभियोजन की पूरी प्रक्रिया में कई बड़ी और गंभीर खामियां पाईं, जो इस प्रकार हैं:

आरोपियों की पहचान पर सवाल: उपद्रव और आगजनी के समय मौके पर मौजूद कथित आरोपियों की पहचान को वैधानिक और पुख्ता रूप से साबित नहीं किया जा सका।

देशद्रोह के सबूतों का अभाव: आरोपियों के खिलाफ देशद्रोह और जानबूझकर आगजनी करने के इरादे से जुड़े आवश्यक कानूनी तत्व और दस्तावेजी साक्ष्य पेश करने में अभियोजन पक्ष विफल रहा।

गवाहों के बयानों में विरोधाभास: मामले की जांच के दौरान पेश किए गए गवाहों के बयानों में काफी विरोधाभास दिखा। इसके अलावा, मौके से जुटाए गए भौतिक सबूतों की कोई मजबूत फोरेंसिक पुष्टि (Forensic Corroboration) भी कोर्ट के समक्ष पेश नहीं की जा सकी।

इन सभी कानूनी कमजोरियों और जांच की खामियों को आधार बनाते हुए हाई कोर्ट ने आरोपी डेरा समर्थकों—धर्मपाल, जसबीर, शिव कुमार और बलबीर की रिहाई के फैसले को यथावत रखा है। इस फैसले से जहां हरियाणा सरकार को बड़ा झटका लगा है, वहीं आरोपी डेरा समर्थकों को बड़ी कानूनी राहत मिली है।

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