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Haryana News: पानी पर खत्म हुई तकरार, राजस्थान से बनी ऐतिहासिक सहमति

29 जून 2026 को हरियाणा और राजस्थान के बीच 32 वर्षों से चले आ रहे जल विवाद का ऐतिहासिक समाधान निकल आया है।

Haryana News

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जून 29, 2026

Haryana News: भारतीय जल कूटनीति के इतिहास में 29 जून 2026 की तारीख एक स्वर्णिम उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गई है। दशकों से चले आ रहे हरियाणा और राजस्थान के बीच जल बंटवारे के जटिल विवाद का अब सुखद समाधान निकल आया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की कुशल मध्यस्थता और दूरदर्शी पहल के चलते दोनों राज्यों ने एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह प्रशासनिक उपलब्धि न केवल दोनों राज्यों के बीच विश्वास बहाली का प्रतीक है, बल्कि लाखों किसानों और आम नागरिकों के जीवन में नई खुशहाली का सूत्रपात भी है।

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32 वर्षों के लंबे संघर्ष का पटाक्षेप

हरियाणा और राजस्थान के मध्य जल वितरण को लेकर खींचतान पिछले 32 वर्षों से जारी थी। कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था और जल की कमी वाले भौगोलिक क्षेत्रों के कारण, दोनों राज्यों के बीच इस मुद्दे पर आम सहमति बनाना एक कठिन चुनौती थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित उच्च-स्तरीय बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की उपस्थिति रही। शीर्ष नेतृत्व की यह सक्रिय भागीदारी समझौते की गंभीरता और भविष्य के प्रति राज्यों की दृढ़ प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

समझौते के मुख्य स्तंभ और जल सुरक्षा का नया द्वार

यह समझौता केवल एक प्रशासनिक कार्यवाही नहीं, बल्कि भविष्य की जल सुरक्षा का आधार है। इसमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी है:

1994 समझौते का क्रियान्वयन: समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू राजस्थान को वर्ष 1994 के ‘अपर यमुना रिवर बोर्ड’ (Upper Yamuna River Board) के प्रावधानों के अनुरूप पानी का हिस्सा मिलना है। यह कदम राजस्थान के उन शुष्क और प्यासे क्षेत्रों के लिए जीवनदायिनी सिद्ध होगा, जो दशकों से जल संकट से जूझ रहे थे।

बहुउद्देशीय बांध परियोजनाओं को गति: रेणुका, किशाऊ और लखवार जैसी प्रमुख बहुउद्देशीय बांध परियोजनाओं के निर्माण में तेजी लाने का निर्णय लिया गया है। ये परियोजनाएं भविष्य में जल भंडारण क्षमता को बढ़ाएंगी, जिससे सिंचाई और पेयजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

सहयोगात्मक जल प्रबंधन: दोनों राज्य अब जल संरक्षण और वितरण के लिए तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर मिलकर काम करेंगे। यह आपसी सहयोग भविष्य में जल संकट जैसी चुनौतियों का सामना करने के लिए एक मजबूत सुरक्षा घेरा तैयार करेगा।

विकास की नई राह और भविष्य की संभावनाएं

केंद्र सरकार ने इसे दो राज्यों के बीच ‘विश्वास का सेतु’ करार दिया है। इस पहल के परिणामस्वरूप न केवल कृषि उत्पादकता में गुणात्मक वृद्धि होगी, बल्कि औद्योगिक विकास और पेयजल किल्लत जैसी समस्याओं का भी स्थायी समाधान निकलेगा। यह ऐतिहासिक समझौता इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सही नेतृत्व और निरंतर संवाद से देश के सबसे पुराने और उलझे हुए विवादों को भी सुलझाया जा सकता है। हरियाणा और राजस्थान की जनता के लिए यह विकास के एक नए युग का उदय है, जो भविष्य में देश के अन्य राज्यों के लिए जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक अनुकरणीय मॉडल (Role Model) के रूप में देखा जाएगा।

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