SIGN IN

Haryana News: हरियाणा में फिर सियासी हलचल, बीजेपी प्रभारी से मिले कांग्रेस के बीरेंद्र सिंह

दिल्ली में हरियाणा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चौधरी बीरेंद्र सिंह और बीजेपी प्रभारी सतीश पूनिया की मुलाकात ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दिया है।

Haryana News

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 10, 2026

Haryana News: हरियाणा के राजनीतिक परिदृश्य में एक बार फिर ‘पर्दे के पीछे की राजनीति’ चर्चाओं के केंद्र में है। दिल्ली में हुई एक उच्च-स्तरीय मुलाकात ने राज्य के सियासी गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। हरियाणा कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह की हरियाणा बीजेपी के प्रभारी सतीश पूनिया के साथ हुई गोपनीय भेंट ने कई राजनीतिक समीकरणों की ओर संकेत किए हैं। यद्यपि इसे व्यक्तिगत मुलाकात बताया जा रहा है, लेकिन हरियाणा की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए विश्लेषक इसे केवल एक सामान्य शिष्टाचार नहीं मान रहे हैं।

Tej Pratap Yadav: नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी के बीच तनातनी? तेज प्रताप के दावे ने बढ़ाई हलचल

शिष्टाचार भेंट या राजनीतिक बिसात?

चौधरी बीरेंद्र सिंह हरियाणा की सियासत के एक ऐसे स्तंभ हैं, जिनका अनुभव और प्रभाव किसी दल विशेष तक सीमित नहीं है। उनका बीजेपी में पुराना इतिहास रहा है, जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस का हाथ थामा था। ऐसे में, जब वे सत्ताधारी दल के प्रदेश प्रभारी सतीश पूनिया से मिलते हैं, तो राजनीतिक गलियारों में कयास लगना स्वाभाविक है। विशेषज्ञों का मानना है कि हरियाणा में लगातार बदल रही राजनीतिक परिस्थितियों के बीच, बीरेंद्र सिंह जैसे अनुभवी नेता की सक्रियता किसी बड़े बदलाव की आहट हो सकती है।

मुलाकात का आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक न होने के कारण, अटकलों का सिलसिला और गहरा होता गया। हालांकि, राजनीति में अक्सर जो दिखता है, वह पूरी सच्चाई नहीं होती, लेकिन यह बैठक स्पष्ट रूप से उन राजनीतिक पंडितों के लिए एक बड़ा ‘पजल’ बन गई है, जो राज्य में भविष्य की सत्ता की बिसात बिछाने में लगे हैं।

बीरेंद्र सिंह का स्पष्टीकरण और कांग्रेस के साथ प्रतिबद्धता

बढ़ते सियासी दबाव और मीडिया में चल रही अटकलों को देखते हुए, चौधरी बीरेंद्र सिंह ने स्वयं सामने आकर स्थिति को स्पष्ट करना जरूरी समझा। उन्होंने इन सभी कयासों को सिरे से खारिज करते हुए इसे केवल ‘पुरानी मित्रता’ का परिणाम बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा, “सतीश पूनिया जी से मेरा और मेरे परिवार का दशकों पुराना संबंध है। उनके राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने के उपलक्ष्य में मैं उन्हें बधाई देने गया था। इसे राजनीति के चश्मे से देखना गलत है।”

अपने दल बदलने या कांग्रेस छोड़ने की चर्चाओं पर पूर्णविराम लगाते हुए बीरेंद्र सिंह ने अपनी निष्ठा दोहराई। उन्होंने कहा कि वे कांग्रेस के साथ मजबूती से खड़े हैं और पार्टी की विचारधारा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अटूट है। उन्होंने अपने बयानों से उन तमाम दावों की हवा निकाल दी, जो उनकी घर वापसी की बातें कर रहे थे।

सस्पेंस अभी भी बरकरार

भले ही बीरेंद्र सिंह ने मामले को शांत करने का प्रयास किया हो, लेकिन हरियाणा के राजनीतिक विश्लेषक इसे आसानी से पचा नहीं पा रहे हैं। राज्य में हाल के वर्षों में जिस प्रकार के उलटफेर देखे गए हैं, उसके चलते हर बड़ी मुलाकात को ‘सियासी अर्थ’ के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। बीरेंद्र सिंह और सतीश पूनिया की इस भेंट ने यह तो साबित कर दिया है कि हरियाणा की राजनीति में अभी भी सस्पेंस बरकरार है। जब तक आगामी चुनावों और राजनीतिक समीकरणों की तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हो जाती, तब तक ऐसे दिग्गज नेताओं की मुलाकातें चर्चा का विषय बनी रहेंगी। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि हरियाणा की सियासत फिलहाल किसी भी बड़े मोड़ पर मुड़ने के लिए तैयार है।

Jyeshtha Purnima Celebration: भक्ति और उल्लास का संगम, ज्येष्ठ पूर्णिमा पर दिव्य बना वैदिक प्रभात आश्रम

Post Tags

, , , , ,