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Haryana News: हरियाणा में हाईवे से बेसहारा पशु हटाने का प्लान तैयार, अधिकारियों की जिम्मेदारी तय

हरियाणा सरकार ने हाईवे पर बेसहारा पशुओं के कारण होने वाले सड़क हादसों को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने का फैसला किया है।

Haryana News

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 18, 2026

Haryana News: हरियाणा में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर बेसहारा पशुओं के कारण होने वाले सड़क हादसों को रोकने के लिए सरकार ने निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़कें) ने प्रदेश के हाईवे पर ऐसे संवेदनशील हिस्सों की पहचान की है, जहां सड़क पर पशुओं के पहुंचने से दुर्घटनाओं का खतरा अधिक रहता है। सरकार का उद्देश्य वाहन चालकों को सुरक्षित यात्रा उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन कारणों का पता लगाना भी है, जिनकी वजह से पशु बार-बार सड़कों पर पहुंचते हैं।

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सड़क और किलोमीटर के हिसाब से तैयार हुआ रिकॉर्ड

विभाग की ओर से तैयार की गई योजना में केवल संवेदनशील स्थानों की पहचान नहीं की गई है, बल्कि प्रत्येक सड़क की विस्तृत जानकारी भी दर्ज की गई है। इसमें सड़क का नाम, उसकी श्रेणी, कुल लंबाई, वह किलोमीटर जहां बेसहारा पशुओं की मौजूदगी अधिक है, नोडल अधिकारी, कनिष्ठ अभियंता (JE) और संबंधित फील्ड कर्मचारियों के नाम व मोबाइल नंबर शामिल किए गए हैं।

इस व्यवस्था का मकसद किसी स्थान पर बार-बार पशुओं के दिखाई देने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करना और जिम्मेदारी तय करना है। इससे निगरानी व्यवस्था अधिक प्रभावी होने के साथ स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित की जा सकेगी।

नूंह और गुरुग्राम में इन जगहों पर बढ़ा खतरा

सर्वे के दौरान सामने आया कि कई जगहों पर खाने-पीने की दुकानों और बाजारों के आसपास पशुओं का जमावड़ा रहता है। गुरुग्राम-अलवर राष्ट्रीय राजमार्ग-248ए पर नूंह शहर के आसपास फल और बिरयानी की दुकानों के कारण बेसहारा पशुओं और कुत्तों के सड़क पर आने की समस्या दर्ज की गई है।

फिरोजपुर झिरका में सब्जी मंडी और दोहा चौक के आसपास भी ऐसी स्थिति सामने आई है। इन स्थानों पर सड़क किनारे मौजूद खाद्य सामग्री पशुओं को आकर्षित करती है, जिससे वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का जोखिम बढ़ जाता है।

रोहतक और भिवानी में भी कई हॉटस्पॉट

रोहतक-भिवानी-लोहारू राजमार्ग पर लाहली गांव के पास पशु आहार की दुकान और गोशाला के आसपास पशुओं की मौजूदगी दर्ज की गई है। वहीं भिवानी शहर, कलानौर, जुई और लोहारू में सब्जी मंडियों तथा फल की रेहड़ियों के आसपास पशुओं के जमा होने की समस्या सामने आई है।

हिसार, हांसी, फतेहाबाद और सिरसा के कई मार्गों पर भी विशेष निगरानी की व्यवस्था की गई है। सरदूलगढ़-सिरसा-ऐलनाबाद मार्ग और रतिया-फतेहाबाद सेक्शन समेत कई हिस्सों में नोडल अधिकारियों और निगरानी दलों की जिम्मेदारी तय की गई है।

पंचकूला, कैथल और झज्जर में भी निगरानी

कैथल और जींद के कई प्रमुख मार्गों को भी जोखिम वाले हिस्सों के तौर पर चिन्हित किया गया है। पंचकूला के पिंजौर बाईपास और पिंजौर-बद्दी-नालागढ़ मार्ग पर भी निगरानी बढ़ाने की व्यवस्था की गई है।

वहीं, सर्वे में सभी सड़कों को जोखिम वाला नहीं बताया गया है। झज्जर-सुबाना-कोसली और झज्जर-बहादुरगढ़ जैसे कुछ मार्गों के सामने ‘Nil’ दर्ज किया गया है। इसका मतलब है कि वहां बेसहारा पशुओं से जुड़ी कोई प्रमुख समस्या चिन्हित नहीं की गई।

सिर्फ पशुओं को हटाना नहीं, समस्या की जड़ पर होगा फोकस

सरकार की यह जोखिम-मैपिंग व्यवस्था केवल हाईवे से पशुओं को हटाने तक सीमित नहीं है। इसमें उन कारणों पर भी ध्यान दिया जा रहा है, जिनकी वजह से पशु बार-बार सड़क पर पहुंचते हैं। मंडियों, ढाबों, पशु आहार की दुकानों और गोशालाओं के आसपास विशेष निगरानी इसी दिशा में अहम कदम है।

नई व्यवस्था से संवेदनशील स्थानों पर समय रहते कार्रवाई की उम्मीद है। इससे हाईवे पर वाहन चालकों की सुरक्षा बढ़ेगी और बेसहारा पशुओं के कारण होने वाले सड़क हादसों में कमी लाने में मदद मिल सकती है।

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