Haryana News: हरियाणा में आगामी कृषि सीजन को लेकर किसानों की चिंताएं और मांगें सामने आने लगी हैं। भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने राज्य सरकार से यह मांग जोर-शोर से उठाई है कि वर्ष 2026-27 के लिए धान की सरकारी खरीद की शुरुआत आगामी 15 सितंबर 2026 से कर दी जाए। उनका कहना है कि खरीद प्रक्रिया शुरू होने से पहले किसानों की फसल की निर्बाध खरीद, समय पर भुगतान और मंडियों से धान के समय पर उठान की पुख्ता प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि अन्नदाताओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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लंबित सीएमआर डिलीवरी और शैलर मालिकों की स्थिति पर सवाल
चढूनी ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को लिखे गए एक पत्र को गुरुवार को चंडीगढ़ में सार्वजनिक किया। पत्र का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 की धान खरीद से जुड़ा लगभग 6.69 लाख टन चावल अभी भी डिलीवर होना बाकी है। हालांकि केंद्र सरकार ने चावल जमा करवाने की समय-सीमा को बढ़ाकर 30 सितंबर तक कर दिया है, फिर भी भारतीय खाद्य निगम द्वारा हरियाणा के निर्धारित 36 लाख टन के खरीद लक्ष्य को पूरा करने की बात कही जा रही है।
ऐसी परिस्थितियों में किसान नेता ने सरकार से मांग की है कि वह स्थिति स्पष्ट करे। सरकार को यह बताना चाहिए कि पिछले साल की लंबित कस्टम मिल्ड राइस (CMR) डिलीवरी का इस बार की नई खरीद व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा। यदि राइस मिलर धान उठाने में असमर्थ रहते हैं या कोई हड़ताल जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो ऐसी दशा में किसानों की फसल की खरीद और उसका सुरक्षित उठान किस प्रकार सुनिश्चित किया जाएगा। चढूनी ने दो टूक कहा कि किसानों को किसी भी सूरत में अपनी तैयार फसल को औने-पौने दामों पर निजी व्यापारियों के हाथों बेचने के लिए विवश नहीं किया जाना चाहिए।
वैकल्पिक भंडारण और उठान की पुख्ता व्यवस्था की मांग
किसान नेता ने सुझाव दिया कि यदि किसी कारणवश राइस मिलर धान लेने में असमर्थता जताते हैं, तो सरकारी एजेंसियों को अपने स्तर पर पर्याप्त भंडारण, अस्थायी स्टोरेज और त्वरित उठान की व्यवस्था करनी चाहिए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि मंडियों में किसानों की फसल का अंबार न लगे और उनकी उपज समय पर बिक सके।
पंजीकृत रकबे के आंकड़ों का अंतर और बायोमेट्रिक व्यवस्था की चुनौतियां
‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल के आंकड़ों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि पोर्टल पर 4,83,897 किसानों द्वारा 28,80,192 एकड़ गैर-बासमती धान का रकबा पंजीकृत किया गया था, जबकि कृषि विभाग द्वारा सत्यापन के दौरान 30,16,285 एकड़ रकबा वेरीफाई किया गया। इन दोनों आंकड़ों में लगभग 1,36,116 एकड़ का बड़ा अंतर साफ दिखाई देता है। इसके अलावा, धान खरीद में नई बायोमेट्रिक व्यवस्था को लागू किए जाने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई। उनका कहना है कि इस बायोमेट्रिक प्रक्रिया के कारण जमीनी स्तर पर किसानों को भारी व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
इन तमाम समस्याओं से बचने के लिए 15 सितंबर से सरकारी खरीद शुरू करना ही किसानों के हित में सबसे उपयुक्त और प्रभावी समाधान है। चढूनी ने अंत में जोर देकर कहा कि सरकार को सीजन शुरू होने से पहले सभी खरीद एजेंसियों, मंडी अधिकारियों, आढ़तियों और मिल प्रबंधनों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक करनी चाहिए, ताकि प्रत्येक मंडी में खरीद, भुगतान, भंडारण और उठान की एक पारदर्शी कार्य-योजना समय रहते तैयार की जा सके।







