Haryana News: हरियाणा सरकार ने राज्य के किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को खरीफ-2026 और रबी-2026-27 सीजन के लिए लागू कर दिया है। इस बार योजना में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिनका उद्देश्य किसानों को अधिक सुरक्षा और समय पर मुआवजा उपलब्ध कराना है। सबसे अहम बदलाव यह है कि अब फसल कटाई के बाद भी किसानों को 14 दिनों तक बीमा सुरक्षा मिलेगी। यदि इस अवधि में बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि या अन्य प्राकृतिक कारणों से खेत में रखी फसल को नुकसान होता है तो किसान बीमा दावे के पात्र होंगे।
इसके साथ ही सरकार ने बीमा कंपनियों के लिए भी सख्त प्रावधान किए हैं। यदि कोई कंपनी तय समय के भीतर दावा राशि का भुगतान नहीं करती है, तो उसे किसानों को 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करना होगा।
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इन फसलों को मिलेगा योजना का लाभ
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार योजना के तहत खरीफ और रबी दोनों मौसम की प्रमुख फसलों को शामिल किया गया है।
खरीफ सीजन में धान, बाजरा, मक्का, कपास और मूंग को योजना का लाभ मिलेगा। इन फसलों के लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गई है।
वहीं रबी सीजन में गेहूं, जौ, चना, सरसों और सूरजमुखी को शामिल किया गया है। इन फसलों के लिए किसान 31 दिसंबर तक आवेदन कर सकते हैं।
प्राकृतिक आपदाओं पर मिलेगा बीमा लाभ
योजना के तहत सूखा, बाढ़, जलभराव, चक्रवात, ओलावृष्टि, तूफान और कीटों के प्रकोप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कवर किया गया है। यदि कटाई के बाद खेत में रखी फसल 14 दिनों के भीतर खराब मौसम के कारण क्षतिग्रस्त होती है, तो किसान बीमा क्लेम कर सकते हैं।
हालांकि इसके लिए किसानों को नुकसान की जानकारी 72 घंटे के भीतर संबंधित माध्यमों पर दर्ज करानी होगी। सूचना कृषि रक्षक पोर्टल, हेल्पलाइन 14447 या क्रॉप लॉस मोबाइल ऐप के माध्यम से दी जा सकती है।
कम प्रीमियम में मिलेगा बड़ा बीमा कवर
इस योजना का लाभ ऋणी और गैर-ऋणी दोनों प्रकार के किसान उठा सकते हैं। सरकार ने किसानों पर आर्थिक बोझ कम रखने के लिए प्रीमियम की दरें भी कम निर्धारित की हैं।
खरीफ फसलों पर केवल 2 प्रतिशत, रबी फसलों पर 1.5 प्रतिशत और कपास पर 5 प्रतिशत प्रीमियम देना होगा। शेष प्रीमियम का भुगतान केंद्र और राज्य सरकार संयुक्त रूप से करेंगी।
सरकार ने विभिन्न फसलों के लिए प्रति हेक्टेयर बीमा राशि भी तय की है। उदाहरण के तौर पर धान के लिए 1.11 लाख रुपये, कपास के लिए 1.14 लाख रुपये, गेहूं के लिए 84,386 रुपये और सरसों के लिए 56,639 रुपये तक का बीमा कवर निर्धारित किया गया है।
तकनीक की मदद से होगा नुकसान का आकलन
योजना को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए इस बार तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। गेहूं और धान की उपज का आकलन आधुनिक तकनीकी प्रणाली से किया जाएगा, जबकि अन्य फसलों के लिए क्रॉप कटिंग प्रयोग (CCE) जारी रहेंगे।
इस कार्य में हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (HARSAC) को तकनीकी सहयोगी बनाया गया है। इससे नुकसान के आकलन और बीमा दावों के निपटान में तेजी आएगी तथा किसानों को समय पर मुआवजा मिलने में सुविधा होगी।
सरकार का मानना है कि इन नए प्रावधानों से किसानों को प्राकृतिक आपदाओं के समय बेहतर आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और फसल नुकसान की स्थिति में राहत प्राप्त करने की प्रक्रिया पहले से अधिक सरल और पारदर्शी बनेगी।
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