Haryana News: हरियाणा में लंबे समय से जारी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल को खत्म कराने के प्रयासों के बीच शनिवार को कुरुक्षेत्र के जिमखाना क्लब में सरकार और कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधियों के बीच अहम बैठक हुई। कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी की मौजूदगी में करीब दो घंटे तक चली इस बैठक में सफाई कर्मचारियों की विभिन्न मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई। हालांकि, लंबी बातचीत के बावजूद सरकार और कर्मचारी नेताओं के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी।
बैठक में नगरपालिका कर्मचारी संघ के प्रदेश प्रधान नरेश शास्त्री समेत यूनियन के कई पदाधिकारी और कर्मचारी प्रतिनिधि शामिल हुए। कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को सरकार के सामने प्रमुखता से रखा और उनके जल्द समाधान की मांग की।
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कई मुद्दों पर बातचीत आगे नहीं बढ़ी
बैठक के दौरान कर्मचारी नेताओं ने अपनी मांगों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सरकार के साथ चर्चा की। कुछ विषयों पर बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ती नजर आई, लेकिन कई अहम मांगों को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने रहे।
कर्मचारी प्रतिनिधियों का कहना था कि लंबे समय से उनकी मांगों पर विचार किया जा रहा है, लेकिन अब वे केवल आश्वासन के बजाय ठोस निर्णय चाहते हैं। यूनियन ने सरकार से मांगों को लेकर स्पष्ट और लिखित आश्वासन देने पर जोर दिया।
बैठक के दौरान एक समय स्थिति उस समय असहज हो गई, जब मंत्री कृष्ण बेदी बैठक से बाहर चले गए। इससे बातचीत का माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया। हालांकि, अधिकारियों ने हस्तक्षेप करते हुए कर्मचारी नेताओं से बातचीत जारी रखने और स्थिति को संभालने का प्रयास किया।
नरेश शास्त्री ने साफ किया रुख
बैठक समाप्त होने के बाद नगरपालिका कर्मचारी संघ के प्रदेश प्रधान नरेश शास्त्री ने कर्मचारियों का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारी अपने अधिकारों और जायज मांगों के लिए आंदोलन कर रहे हैं और वे अपने हितों से जुड़े मुद्दों पर पीछे हटने वाले नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि यूनियन बातचीत के जरिए विवाद का समाधान चाहती है। सरकार की ओर से दोबारा वार्ता के लिए निमंत्रण दिया गया है, इसलिए कर्मचारी प्रतिनिधि अगली बैठक में भी शामिल होंगे। उनका कहना था कि बातचीत सकारात्मक होनी चाहिए और कर्मचारियों की मांगों पर ठोस फैसला लिया जाना चाहिए।
मौखिक आश्वासन नहीं, लिखित निर्णय की मांग
नरेश शास्त्री ने जोर देकर कहा कि कर्मचारियों को अब केवल मौखिक आश्वासनों से संतुष्ट नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि जिन मांगों पर सरकार सहमत होती है, उनके संबंध में स्पष्ट और लिखित निर्णय होना जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी तरह का भ्रम या विवाद न रहे।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि अगली बातचीत में कोई ठोस समाधान नहीं निकलता है तो कर्मचारियों का आंदोलन जारी रह सकता है।
आगे क्या होगा?
बैठक बेनतीजा रहने के बाद सरकार और सफाई कर्मचारी संगठनों के बीच गतिरोध फिलहाल बरकरार है। हालांकि, दोबारा बातचीत के संकेत मिलने से समाधान की उम्मीद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
अब निगाहें अगली बैठक पर टिकी हैं। यदि सरकार और कर्मचारी संगठन प्रमुख मांगों पर सहमति बनाने में सफल होते हैं, तो लंबे समय से चल रही हड़ताल समाप्त हो सकती है। वहीं, बातचीत फिर विफल रहने की स्थिति में आंदोलन और लंबा खिंचने की संभावना है।
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