Haryana News: हरियाणा की सियासत में पानी के अधिकार को लेकर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के राष्ट्रीय संरक्षक और हरियाणा के पूर्व वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह ने फतेहाबाद में प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार भाखड़ा कमांड से यमुना कमांड एरिया को पानी देने के लिए भाखड़ा प्रणाली में जगह-जगह ‘पंचर’ (अवैध व मनमाने बदलाव) कर रही है। इनेलो नेता ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपनी इस नीति को तुरंत नहीं बदला, तो हरियाणा का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह बंजर हो जाएगा।
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प्रो. संपत सिंह ने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए समझाया कि पहले धमतान डिस्ट्रीब्यूटरी और सिवानी फीडर को यमुना नदी का पानी मिलता था। लेकिन वर्तमान सरकार ने नियमों और तकनीकी व्यवस्था को ताक पर रखकर इन्हें भाखड़ा प्रणाली से जोड़ दिया है। सरकार के इस मनमाने फैसले के कारण भाखड़ा कमांड का लगभग 240 क्यूसेक पानी कम हो गया है। जगह-जगह पंचर करके इस पानी को यमुना कमांड एरिया में पेयजल सप्लाई के लिए डाइवर्ट किया जा रहा है। उन्होंने आगाह किया कि यदि इसी तरह किसानों के हक का पानी काटा गया, तो फतेहाबाद, सिरसा, नलवा, हिसार शहर और आदमपुर जैसे क्षेत्रों में खेती और पीने के पानी का गहरा संकट खड़ा हो जाएगा।
पंजाब को दिए पैसे, लेकिन भाजपा मुख्यमंत्रियों की नाकामी से रुकी योजना
पूर्व वित्त मंत्री ने इस पूरे विवाद का तकनीकी और प्रशासनिक पक्ष रखते हुए बताया कि पंजाब क्षेत्र में भाखड़ा मुख्य नहर की बुर्जी नंबर 445 से 466 तक मरम्मत करके और उसके किनारों को ऊंचा उठाकर हरियाणा के लिए 450 क्यूसेक अतिरिक्त पानी बढ़ाया जा सकता है। इस योजना के तहत नहर के किनारों की ऊंचाई को 18 फुट से बढ़ाकर 19.4 फुट किया जाना तय हुआ था। हरियाणा सरकार ने इसके लिए 21 जनवरी 2015 को ही ₹372.11 लाख की भारी-भरकम राशि पंजाब सरकार के खाते में जमा करवा दी थी।
जब पंजाब सरकार इस परियोजना पर काम कर ही रही थी, तभी राजस्थान की तत्कालीन भाजपा मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को एक पत्र लिखकर इस पर कड़ी आपत्ति जता दी। राजस्थान का दावा था कि इस बदलाव से हरियाणा उनके हिस्से का पानी छीन लेगा। प्रो. संपत सिंह ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए साफ किया कि हरियाणा सिर्फ अपने हक का पानी मांग रहा था, न कि राजस्थान का।
मनोहर लाल खट्टर की चुप्पी पर उठाए सवाल
इनेलो नेता ने तत्कालीन हरियाणा सरकार की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आपत्ति आने के बाद हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को तुरंत अपनी ही पार्टी की राजस्थान सरकार और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से बातचीत कर मामला सुलझाना चाहिए था। लेकिन खट्टर सरकार ने इस दिशा में कोई सार्थक प्रयास नहीं किया। मुख्यमंत्रियों की इसी राजनीतिक नाकामी और इच्छाशक्ति की कमी के कारण यह बेहद महत्वपूर्ण जल परियोजना अधर में लटक गई।
प्रो. संपत सिंह ने तकनीकी ढांचे को स्पष्ट करते हुए कहा कि बरवाला लिंक नहर की वर्तमान डिजाइन क्षमता 1750 क्यूसेक पानी वहन करने की है। यदि पंजाब से हरियाणा को उसके हक का 450 क्यूसेक अतिरिक्त पानी मिल जाता है, तो बरवाला लिंक इसे आसानी से संभाल सकता है। इससे सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, नलवा और आदमपुर के किसानों को सिंचाई और आम जनता को पीने का पानी नियमित रूप से मिल सकेगा। उन्होंने साफ शब्दों में सरकार को चेताया कि यदि किसानों के हक पर डाका डाला गया और भाखड़ा क्षेत्र को प्यासा रखा गया, तो इनेलो चुप नहीं बैठेगी और इसके खिलाफ बड़ा जन-आंदोलन खड़ा करेगी।
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