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Nautapa 2026: नौतपा में लू क्यों हो जाती है खतरनाक, जानें 9 दिनों की पहचान और बचाव की जरूरत

नौतपा 2026 के दौरान गर्मी और लू का असर कई राज्यों में तेज हो सकता है। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के बाद शुरू होने वाले ये 9 दिन साल के सबसे गर्म माने जाते हैं। ऐसे में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और तेज गर्म हवाओं से बचाव बेहद जरूरी है।

नौतपा में लू क्यों हो जाती है खतरनाक

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

मई 22, 2026

Nautapa 2026: मई का महीना आते ही देश के कई राज्यों में गर्मी का असर तेजी से बढ़ने लगता है। इसी दौरान मौसम से जुड़ा एक शब्द काफी चर्चा में रहता है, जिसे नौतपा कहा जाता है। आमतौर पर इसे साल का सबसे गर्म समय माना जाता है। इस दौरान तेज धूप, गर्म हवाएं और बढ़ता तापमान लोगों की परेशानी बढ़ा देता है।

नौतपा का प्रभाव खासकर उत्तर भारत और मध्य भारत के मैदानी इलाकों में अधिक दिखाई देता है। इन दिनों दिन के समय सूरज की तपिश काफी तेज महसूस होती है और कई शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है। कई जगहों पर लू चलने लगती है, जिससे बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है।

नौतपा के 9 दिन कैसे तय किए जाते हैं?

पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, नौतपा की शुरुआत तब मानी जाती है जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है। हर साल यह समय सामान्य तौर पर 25 मई से 2 जून के बीच आता है। हालांकि, सूर्य की चाल और खगोलीय गणना के आधार पर इसकी तारीखों में थोड़ा बदलाव हो सकता है।

ज्योतिष शास्त्र में माना जाता है कि सूर्य सालभर में 27 नक्षत्रों से होकर गुजरता है। जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो उसके शुरुआती 9 दिनों को नौतपा कहा जाता है। इन 9 दिनों में गर्मी सबसे ज्यादा तीखी और असरदार मानी जाती है।

रोहिणी नक्षत्र में क्यों बढ़ती है गर्मी?

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, रोहिणी नक्षत्र को शीतलता, उर्वरता और प्रकृति से जुड़ा माना जाता है। वहीं सूर्य को ऊर्जा, अग्नि और गर्मी का प्रतीक माना जाता है। जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो इस संयोग के कारण धरती पर गर्मी का असर बढ़ने लगता है। कहा जाता है कि रोहिणी नक्षत्र में सूर्य की शुरुआती गति के दौरान उसकी तपिश सबसे ज्यादा महसूस होती है। इसी वजह से इन दिनों को नौतपा कहा जाता है और इन्हें गर्मी के लिहाज से बेहद कठिन माना जाता है।

नौतपा के पीछे वैज्ञानिक कारण

वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो इस समय सूर्य की किरणें उत्तरी गोलार्ध के बड़े हिस्से पर अधिक सीधी पड़ती हैं। इससे धरती की सतह ज्यादा गर्मी सोखती है और लंबे समय तक उसे बनाए रखती है। मैदानी इलाकों और शहरों में सड़कें, इमारतें और कंक्रीट गर्मी को ज्यादा देर तक रोककर रखते हैं, जिससे तापमान और बढ़ जाता है। इसी कारण दिन में तेज धूप के साथ-साथ रात में भी गर्मी महसूस होती है। कई जगहों पर नमी कम होने की वजह से हवा और ज्यादा सूखी व झुलसाने वाली हो जाती है।

नौतपा की पहचान कैसे करें?

नौतपा की सबसे बड़ी पहचान अचानक बढ़ती गर्मी और तेज लू है। इस दौरान सुबह 9 या 10 बजे से ही गर्म हवाएं चलनी शुरू हो जाती हैं। दोपहर होते-होते तापमान काफी ऊपर पहुंच जाता है और खुले में रहना मुश्किल हो जाता है। उत्तर और मध्य भारत के कई इलाकों में इस दौरान तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा दर्ज किया जा सकता है। कुछ स्थानों पर यह 50 डिग्री सेल्सियस के आसपास भी पहुंच सकता है।

नौतपा की लू क्यों ज्यादा खतरनाक होती है?

नौतपा के दिनों में लू इसलिए अधिक खतरनाक मानी जाती है क्योंकि इस समय दिन और रात दोनों में तापमान ऊंचा रहता है। सामान्य गर्मी में शाम के बाद कुछ राहत मिल जाती है, लेकिन नौतपा में सूर्यास्त के बाद भी वातावरण गर्म बना रहता है। लगातार गर्मी बने रहने से शरीर पर ज्यादा दबाव पड़ता है और हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन व थकान जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए नौतपा के दौरान धूप से बचना, पानी पीते रहना और जरूरत पड़ने पर ही बाहर निकलना बेहद जरूरी होता है।

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