Monsoon Session 2026: हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र 27 अगस्त से शुरू होने जा रहा है, और राजनीतिक गलियारों में अभी से इसके बेहद हंगामेदार और तीखा रहने के कयास लगाए जाने लगे हैं। इस सत्र में केवल विधायी कामकाज तक सीमित रहने के बजाय सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़ा राजनीतिक मुकाबला देखने को मिल सकता है। विपक्षी दल सरकार को घेरने की पूरी रणनीति बना चुके हैं, तो वहीं सत्ता पक्ष भी हर हमले का माकूल जवाब देने के लिए तैयार बैठा है।
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बेरोजगारी और एचकेआरएन
विपक्षी कांग्रेस पार्टी इस सत्र के दौरान सरकार को घेरने के लिए कई अहम मुद्दों को अपना प्रमुख हथियार बनाने जा रही है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएन) की कार्यप्रणाली और नौकरी की सुरक्षा।
प्रदेश में लगातार बढ़ती बेरोजगारी और खाली पड़े सरकारी पदों का मुद्दा।
राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति और आपराधिक घटनाओं पर नियंत्रण।
विपक्ष की रणनीति सिर्फ आरोप लगाने तक सीमित न रहकर सरकार से सीधे तौर पर जवाब मांगने की होगी। वहीं दूसरी ओर, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और उनकी सरकार इन तमाम मुद्दों पर अपनी उपलब्धियों और नीतिगत फैसलों के आंकड़ों के साथ विपक्ष के हमलों का कड़ा मुकाबला करने की तैयारी में है।
सत्ता पक्ष और विपक्ष के अनुभवी चेहरे संभालेंगे मोर्चा
सदन के अंदर बहस के दौरान दोनों ही पक्षों के दिग्गजों पर सबकी निगाहें रहेंगी:
सत्ता पक्ष: वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री अनिल विज अपनी आक्रामक शैली और तथ्यात्मक जवाबों के साथ फ्रंट फुट पर नजर आएंगे। उनके साथ मंत्री महिपाल ढांडा और कृष्ण बेदी भी शिक्षा व प्रशासनिक मुद्दों पर सरकार का पक्ष मजबूती से रखेंगे।
विपक्ष: कांग्रेस की ओर से भारत भूषण बत्रा, अशोक अरोड़ा और गीता भुक्कल जैसे अनुभवी विधायक तीखे सवाल उठाकर सदन की बहस को धार देंगे। इसके अलावा युवा विधायक भी नए राजनीतिक मुद्दों के जरिए अपनी सक्रियता दर्ज कराएंगे।
सज्जन कुमार प्रकरण और अन्य संवेदनशील विषय
सत्र के दौरान केवल प्रशासनिक और जनहित के मुद्दे ही नहीं, बल्कि कुछ राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले भी तूल पकड़ सकते हैं। हाल ही में कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा दिए गए बयानों को लेकर सत्ता पक्ष सदन में कांग्रेस को घेरने की पूरी योजना बना चुका है। भाजपा विधायक इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्टीकरण मांग सकते हैं, जिससे सदन का राजनीतिक तापमान काफी बढ़ सकता है।
सुचारु संचालन की चुनौती और अध्यक्ष की भूमिका
विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने सत्र की तैयारियों का जायजा लेते हुए प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठकें की हैं। उनका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रहे और सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चले। लोकतंत्र में विधानसभा जनता की समस्याओं पर गंभीर चर्चा का सर्वोच्च मंच है। ऐसे में, इस सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वे सियासी हंगामे के बीच जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर सार्थक और मर्यादित चर्चा सुनिश्चित करें।
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