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Haryana News: भर्ती परीक्षा में ‘A को D’ करने पर बवाल, नौकरी के दावे पर हाई कोर्ट का फैसला

सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।

Haryana News

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 22, 2026

Haryana News: हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) की कृषि विकास अधिकारी (ADO) भर्ती परीक्षा में एक प्रश्न के उत्तर को लेकर चल रहे विवाद पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने अभ्यर्थी कमल दीप की याचिका खारिज करते हुए कहा कि स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा जांच और आपत्तियों के बाद तैयार की गई संशोधित उत्तर कुंजी में अदालत अपनी राय नहीं थोप सकती।

यह मामला कृषि एवं किसान कल्याण विभाग में कृषि विकास अधिकारी (प्रशासनिक कैडर) के पदों पर भर्ती से संबंधित था। याचिकाकर्ता का दावा था कि उत्तर कुंजी में बदलाव के कारण उनके अंक कम हो गए और वे चयन प्रक्रिया में आगे नहीं बढ़ सके।

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24 जून 2022 को जारी हुआ था भर्ती विज्ञापन

HPSC ने कृषि विकास अधिकारी के पदों पर भर्ती के लिए 24 जून 2022 को विज्ञापन जारी किया था। भर्ती नियमों के अनुसार सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए लिखित परीक्षा में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 45 प्रतिशत अंक हासिल करना जरूरी था। निर्धारित अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को ही साक्षात्कार के लिए बुलाया जाना था।

याचिकाकर्ता कमल दीप ने 16 अक्टूबर 2022 को आयोजित लिखित परीक्षा में हिस्सा लिया था। उन्हें प्रश्न पुस्तिका की ‘सी’ सीरीज मिली थी। परीक्षा में प्रश्न संख्या 48 के लिए उन्होंने विकल्प ‘ए’ को अपना उत्तर चुना था।

प्रारंभिक और अंतिम उत्तर कुंजी में बदला जवाब

परीक्षा के बाद 27 अक्टूबर 2022 को जारी प्रारंभिक उत्तर कुंजी में प्रश्न संख्या 48 का सही उत्तर विकल्प ‘ए’ बताया गया था। इससे याचिकाकर्ता का चुना हुआ उत्तर सही माना गया। हालांकि, 22 दिसंबर 2022 को घोषित परिणाम में कमल दीप को 49.16 प्रतिशत अंक मिले। इस वजह से वे सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित 50 प्रतिशत की न्यूनतम पात्रता पूरी नहीं कर सके और साक्षात्कार के लिए चयनित नहीं हुए।

इसके बाद 2 फरवरी 2023 को जारी अंतिम उत्तर कुंजी में प्रश्न संख्या 48 का उत्तर बदलकर विकल्प ‘डी’ कर दिया गया। इस बदलाव के कारण याचिकाकर्ता को उस प्रश्न का अंक नहीं मिला। उन्होंने इसी बदलाव को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का रुख किया।

याचिकाकर्ता ने क्या दलील दी?

कमल दीप की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि अंतिम उत्तर कुंजी परिणाम घोषित होने के बाद जारी की गई थी। ऐसे में उन्हें बदले गए उत्तर पर आपत्ति दर्ज कराने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।

उन्होंने एक प्रतिष्ठित संस्थान की अध्ययन सामग्री का हवाला देते हुए यह भी दावा किया कि प्रश्न संख्या 48 के लिए उनके द्वारा चुना गया विकल्प ‘ए’ ही सही था। उनका कहना था कि केवल एक अंक के कारण उनकी पात्रता प्रभावित हुई और सरकारी नौकरी का अवसर हाथ से निकल गया।

हाई कोर्ट ने विशेषज्ञों के फैसले को माना अहम

जस्टिस निधि गुप्ता की अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब किसी स्वतंत्र विशेषज्ञ निकाय द्वारा अभ्यर्थियों की आपत्तियों की जांच करने के बाद उत्तर कुंजी तैयार की जाती है, तो अदालत उस विशेषज्ञ निर्णय को अपनी राय से नहीं बदल सकती।

अदालत ने यह भी कहा कि केवल सहानुभूति या व्यक्तिगत कठिनाई के आधार पर उत्तर पुस्तिका का दोबारा मूल्यांकन कराने का आदेश नहीं दिया जा सकता। किसी एक अभ्यर्थी की शिकायत के कारण पूरी भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करना उचित नहीं होगा।

तकनीकी आधार पर भी याचिका में कमी

कोर्ट ने यह भी पाया कि HPSC पहले ही सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति की सिफारिश कर चुका था। लेकिन याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में उन अभ्यर्थियों को पक्षकार नहीं बनाया था। अदालत के अनुसार यह भी याचिका में एक महत्वपूर्ण प्रक्रियागत कमी थी।

इन सभी कानूनी और प्रक्रियागत पहलुओं को देखते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कमल दीप की याचिका खारिज कर दी। फैसले से साफ है कि भर्ती परीक्षाओं की विशेषज्ञों द्वारा तय की गई अंतिम उत्तर कुंजी में अदालतें सामान्य तौर पर तभी हस्तक्षेप करेंगी, जब उसमें स्पष्ट कानूनी या गंभीर प्रक्रियागत खामी साबित हो।

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