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Haryana News: सेना से डिस्चार्ज के 35 साल बाद न्याय, हाईकोर्ट ने पूर्व सैनिक के पक्ष में सुनाया फैसला

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पूर्व सैनिक भूपिंदर सिंह के पक्ष में फैसला सुनाते हुए केंद्र की याचिका खारिज कर दी। 35 साल बाद उनकी Disability Pension का रास्ता साफ हुआ।

Haryana News

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 26, 2026

Haryana News: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पूर्व सैनिक भूपिंदर सिंह से जुड़े Disability Pension मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने केंद्र सरकार की चुनौती को खारिज करते हुए सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT), चंडीगढ़ के आदेश को बरकरार रखा। इसके साथ ही करीब 35 वर्षों से अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे पूर्व सैनिक के लिए पेंशन का रास्ता साफ हो गया।

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18 साल से ज्यादा की सैन्य सेवा के बाद हुए थे डिस्चार्ज

भूपिंदर सिंह ने 29 दिसंबर 1970 को भारतीय सेना में भर्ती ली थी। भर्ती के समय हुए मेडिकल परीक्षण में उन्हें पूरी तरह स्वस्थ और सैन्य सेवा के लिए फिट पाया गया था। सेना में उन्होंने करीब 18 वर्ष और 215 दिनों तक सेवा की। इसके बाद 31 जुलाई 1989 को उन्हें सेवा से डिस्चार्ज कर दिया गया। सेवा के दौरान उन्हें इस्केमिक हार्ट डिजीज की समस्या हुई। बीमारी के बाद Disability Pension को लेकर उनका लंबा कानूनी संघर्ष शुरू हुआ।

AFT ने 2024 में दिया था पूर्व सैनिक के पक्ष में फैसला

इस मामले में सशस्त्र बल न्यायाधिकरण, चंडीगढ़ ने 6 मई 2024 को भूपिंदर सिंह के पक्ष में फैसला सुनाया था। AFT ने उन्हें दिव्यांगता पेंशन का पात्र माना और उनकी 20 प्रतिशत दिव्यांगता को नियमों के अनुसार 50 प्रतिशत तक राउंड ऑफ करने का निर्देश दिया। न्यायाधिकरण ने यह लाभ 1 अगस्त 1989 यानी सेना से डिस्चार्ज होने के अगले दिन से देने का आदेश दिया था। हालांकि, केंद्र सरकार ने AFT के फैसले को चुनौती देते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया।

केंद्र सरकार ने बीमारी और देरी को बनाया आधार

केंद्र की ओर से दलील दी गई कि मेडिकल बोर्ड ने भूपिंदर सिंह की बीमारी को सैन्य सेवा के कारण हुई या सेवा से बढ़ी हुई बीमारी नहीं माना था। सरकार ने यह भी सवाल उठाया कि पेंशन के लिए दावा करने में करीब 32 साल की देरी हुई। मामले की सुनवाई जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस अमरिंदर सिंह ग्रेवाल की खंडपीठ ने की। अदालत ने केंद्र की दलीलों को स्वीकार नहीं किया और पूर्व सैनिक के पक्ष में फैसला सुनाया।

भर्ती के समय स्वस्थ होने के तथ्य पर जोर

हाईकोर्ट ने माना कि भूपिंदर सिंह जब सेना में भर्ती हुए थे, तब मेडिकल जांच में पूरी तरह फिट पाए गए थे। बीमारी उनके सैन्य सेवाकाल के दौरान सामने आई। अदालत ने ऐसे मामलों में लागू कानूनी सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए कहा कि केवल मेडिकल बोर्ड की राय के आधार पर पूर्व सैनिक को उसके पेंशन अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता, जब बीमारी के संबंध में पर्याप्त आधार मौजूद न हो।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी किया गया उल्लेख

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का भी संदर्भ लिया। अदालत ने Disability Pension से संबंधित नियमों और दिव्यांगता प्रतिशत को राउंड ऑफ करने के प्रावधान पर विचार किया।

खंडपीठ ने राम अवतार मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख किया, जिसके तहत निर्धारित परिस्थितियों में दिव्यांगता को नियमों के अनुसार बढ़ाकर पेंशन लाभ दिया जा सकता है।

केंद्र की याचिका खारिज, पूर्व सैनिक को राहत

सभी तथ्यों और कानूनी प्रावधानों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने AFT के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं पाया।

इस फैसले के बाद भूपिंदर सिंह के लिए 35 साल पुरानी Disability Pension की लड़ाई में बड़ी राहत मिली है। मामला यह भी दर्शाता है कि पूर्व सैनिकों के पेंशन अधिकारों से जुड़े विवादों में भर्ती के समय की मेडिकल स्थिति और सेवाकाल के दौरान सामने आई बीमारी महत्वपूर्ण कानूनी पहलू हो सकते हैं।

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