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Haryana News: Haryana में यमुना को लेकर सख्त सरकार, कचरे से सीवेज तक होगा निपटारा

हरियाणा सरकार ने यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत घरेलू सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और ठोस कचरे के निस्तारण के साथ सहायक नदियों, नालों और जल निकायों से होने वाले प्रदूषण पर भी रोक लगाने की तैयारी है।

Haryana News

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 11, 2026

Haryana News: हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार ने यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने नदी की सफाई के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है, जिसमें यमुना की मुख्य धारा के साथ-साथ उससे जुड़ी सहायक नदियों, नालों, जल निकायों और तटीय क्षेत्रों से आने वाले प्रदूषण को रोकने पर विशेष जोर दिया गया है। योजना के तहत घरेलू सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और ठोस कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।

मंगलवार को मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई यमुना एक्शन प्लान की समीक्षा बैठक में विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा की गई। बैठक में लंबित कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने और निर्माण कार्यों में तेजी लाने के अधिकारियों को निर्देश दिए गए।

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चार बड़े शहरों में STP परियोजनाओं पर जोर

यमुना में घरेलू गंदा पानी पहुंचने से रोकने के लिए गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और पानीपत में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की नई परियोजनाओं और मौजूदा संयंत्रों के अपग्रेडेशन पर काम तेज किया जा रहा है।

गुरुग्राम में धनवापुर और बहरामपुर में 100-100 MLD, नौरंगपुर में 40 MLD तथा सेक्टर-107 में 100 MLD क्षमता वाले STP प्रस्तावित हैं। इन परियोजनाओं की टेंडर प्रक्रिया अगस्त-सितंबर तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

फरीदाबाद के मिर्जापुर में 20 MLD क्षमता वाले STP का काम 30 अगस्त तक शुरू करने की तैयारी है। वहीं सूरजकुंड में 20 MLD क्षमता के संयंत्र की तकनीकी निविदाएं 24 अगस्त तक खोली जानी हैं। सोनीपत के कुंडली में 7.5 MLD और पानीपत के समालखा में 4 MLD क्षमता वाले संयंत्रों की परियोजनाएं भी आगे बढ़ाई जा रही हैं।

औद्योगिक प्रदूषण रोकने के लिए CETP पर फोकस

औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले दूषित पानी और रासायनिक अपशिष्ट को यमुना तक पहुंचने से रोकने के लिए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) स्थापित किए जा रहे हैं।

फरीदाबाद के प्रतापगढ़ में 50 MLD क्षमता वाले CETP के लिए टेंडर जारी हो चुके हैं। इसके अलावा गुरुग्राम के सेक्टर-34 में 20 MLD, बादशाहपुर में 15 MLD और सेक्टर-37 में 9 MLD क्षमता वाले उपचार संयंत्रों की प्रक्रिया को भी तेज किया जा रहा है।

13 जल स्रोतों का होगा कायाकल्प

यमुना से जुड़े स्थानीय जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए फरीदाबाद, करनाल, पानीपत और सोनीपत में 13 प्रमुख जल निकायों की पहचान की गई है। ये जल स्रोत कुल 19.12 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले हैं। इनके पुनरुद्धार का लक्ष्य 31 दिसंबर 2027 रखा गया है।

इसके अलावा यमुना किनारे बसे गांवों में गंदे पानी के निस्तारण के लिए सोनीपत, करनाल और पानीपत में थ्री-पोंड सिस्टम और छोटे STP लगाए जाएंगे।

कचरे से बनेगी ऊर्जा, लगाए जाएंगे तीन बायोगैस प्लांट

ठोस कचरा प्रबंधन के तहत 33 शहरी स्थानीय निकायों को योजना में शामिल किया गया है। कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण करने के साथ उससे ऊर्जा उत्पादन के लिए तीन बायोगैस प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं।

सोनीपत के राई-जाखौली में 400 टन प्रतिदिन क्षमता वाले प्लांट का निर्माण शुरू हो चुका है। यमुनानगर में 150 टन प्रतिदिन क्षमता वाले प्लांट की तकनीकी समीक्षा जारी है, जबकि फरीदाबाद के मोहना-बल्लभगढ़ में 100 टन प्रतिदिन क्षमता वाले प्लांट की DPR तैयार की जा चुकी है।

सरकार का लक्ष्य साफ है कि यमुना में बिना उपचारित सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट या अन्य कचरा न पहुंच सके। इन परियोजनाओं के जरिए नदी के प्रदूषण को कम करने के साथ जल स्रोतों और आसपास के पर्यावरण को भी बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है।

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