SIGN IN

Bikaner Hospital News: सी-सेक्शन के बाद 6 महिलाओं की किडनी फेल, बीकानेर अस्पताल पर उठे सवाल

जयपुर के खो नागोरियान में रिहायशी मकान के भीतर अवैध रूप से चल रही पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण धमाके ने सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Bikaner Hospital News

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जून 9, 2026

Bikaner Hospital News: राजस्थान की स्वास्थ्य सेवाओं पर एक बार फिर गहरा संकट मंडराता दिख रहा है। बीकानेर के प्रतिष्ठित पीबीएम अस्पताल से सामने आई एक हृदयविदारक घटना ने न केवल आम जनता को बल्कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी सकते में डाल दिया है। यहाँ सिजेरियन (सी-सेक्शन) डिलीवरी के बाद छह प्रसूताओं की किडनी अचानक फेल हो गई, जिससे उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है। जीवन और मौत के बीच जूझ रही इन माताओं को बचाने के लिए डॉक्टरों की टीम लगातार उन्हें डायलिसिस पर रख रही है।

Haryana News: हरियाणा सरकार को हाईकोर्ट का निर्देश, सर्वे कार्य में तेजी लाने के आदेश

क्या है पूरा मामला और पीड़ितों की स्थिति?

जानकारी के अनुसार, प्रभावित प्रसूताओं की आयु 20 से 27 वर्ष के बीच है। पीबीएम अस्पताल में सी-सेक्शन ऑपरेशन के उपरांत इन महिलाओं की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उनमें किडनी फेलियर, प्लेटलेट्स में खतरनाक गिरावट, पेशाब बंद होने और मल्टीपल ऑर्गन डिस्फंक्शन जैसे जटिल लक्षण सामने आए। फलौदी निवासी प्रीति समेत सभी छह महिलाएं वर्तमान में आईसीयू (ICU) में भर्ती हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की एक विशेष टीम 24 घंटे उनकी निगरानी कर रही है, लेकिन उनकी स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है।

परिजनों का आक्रोश और चिकित्सा प्रबंधन पर सवाल

इस घटना के सामने आते ही अस्पताल परिसर में परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। पीड़ित परिवारों ने अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन के तुरंत बाद से ही महिलाओं की स्थिति बिगड़ने लगी थी, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने इसे शुरुआती दौर में नजरअंदाज किया। उन्होंने आरोप लगाया कि समय रहते उचित उपचार न मिलने के कारण आज ये छह महिलाएं मौत के मुहाने पर खड़ी हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

अस्पताल प्रशासन का पक्ष और जांच का दायरा

दूसरी ओर, अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही के इन आरोपों को खारिज करते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की है। अधिकारियों का तर्क है कि इस स्थिति के पीछे केवल इन्फेक्शन ही नहीं, बल्कि अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग), मल्टीपल ऑर्गन डिस्फंक्शन सिंड्रोम या कोई अन्य गंभीर मेडिकल कॉम्प्लिकेशन हो सकता है। फिलहाल, अस्पताल की एक उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ टीम मामले की तह तक जाने के लिए जांच कर रही है। यह जांच इस बात पर केंद्रित है कि क्या यह चिकित्सा जगत की कोई अनपेक्षित जटिलता है या इलाज में हुई किसी स्तर की चूक।

बुनियादी सुविधाओं का अभाव और प्रशासनिक विफलता

इस दर्दनाक मामले ने पीबीएम अस्पताल की बुनियादी व्यवस्थाओं की पोल भी खोल कर रख दी है। मरीजों और परिजनों की शिकायतों के अनुसार, अस्पताल में पीने के पानी की भारी किल्लत है, साथ ही वार्डों में एसी और कूलर तक खराब पड़े हैं। भीषण गर्मी और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बीच सुविधाओं के इस अभाव ने मरीजों की पीड़ा को और अधिक बढ़ा दिया है।

एक साथ छह माताओं का जीवन संकट में पड़ना प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी विफलता को दर्शाता है। यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि चिकित्सा के क्षेत्र में सुरक्षा और सुविधाओं के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। फिलहाल, पूरा प्रदेश जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इन परिवारों को न्याय मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं को पूरी तरह रोका जा सके।

Jaipur: अवैध पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट, 3 मौतों से हड़कंप

Post Tags

, , , , , ,