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Sonam Wangchuk Case: वांगचुक केस में पत्नी का पहला रिएक्शन, सरकार के रवैये पर उठाए सवाल

पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद उपजे विवाद में उनकी पत्नी, डॉ. गीतांजलि आंग्मो ने सरकार और अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

Sonam Wangchuk Case

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 19, 2026

Sonam Wangchuk Case: पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद उपजे विवाद ने अब एक गंभीर मोड़ ले लिया है। सोनम वांगचुक की पत्नी, डॉ. गीतांजलि आंग्मो ने सरकार और अस्पताल प्रशासन पर सीधा हमला बोलते हुए इसे स्वास्थ्य सेवा नहीं, बल्कि ‘अघोषित गैर-कानूनी हिरासत’ करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सोनम की बिगड़ती सेहत का दावा पूरी तरह से मनगढ़ंत है, जिसका एकमात्र उद्देश्य उन्हें उनके प्रस्तावित शांति मार्च से रोकना था।

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‘स्वास्थ्य खराब होने का दावा महज एक नौटंकी’

डॉ. गीतांजलि ने अस्पताल के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सोनम की सेहत अस्पताल ले जाए जाने से पहले पूरी तरह स्थिर थी। उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि अस्पताल में भर्ती किए जाने से ठीक एक दिन पहले की शाम उनकी मेडिकल रिपोर्ट में पोटैशियम का स्तर 4.3 था, जो सामान्य श्रेणी में आता है। डॉ. आंग्मो ने प्रश्न उठाया कि यदि प्रशासन को वास्तव में उनकी स्वास्थ्य संबंधी चिंता थी, तो पुलिस को सादे कपड़ों में भेजकर उन्हें जबरन स्ट्रेचर पर उठाने की क्या आवश्यकता थी? उनके अनुसार, यह पूरी कवायद केवल एक सोची-समझी ‘नौटंकी’ है, जिसके माध्यम से प्रशासन उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है।

मार्च रोकने के लिए सत्ता का दुरुपयोग

डॉ. आंग्मो का मानना है कि इस पूरे प्रकरण के पीछे राजनीतिक डर काम कर रहा है। सरकार को यह भय सता रहा था कि यदि सोनम वांगचुक अपने निर्धारित मार्च पर निकलते, तो लाखों लोग उनके साथ जुड़ जाते। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मार्च को विफल करने के लिए सरकारी तंत्र, न्यायपालिका और मीडिया का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जा रहा है। उनके शब्दों में, “शिक्षा प्रणाली से लेकर पुलिस बल तक, हर जगह सत्ता का गलत इस्तेमाल दिख रहा है। सरकार को लगता है कि सोनम को रोकने से वे आंदोलन को दबा लेंगे, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि उनकी अनुपस्थिति में जनता का आक्रोश और भी अधिक तीव्र हो जाएगा।”

मेडिकल रिपोर्ट में हेरफेर और ‘जेल जैसा माहौल’

डॉ. गीतांजलि ने अस्पताल की रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर भी गहरे सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि अस्पताल द्वारा पोटैशियम का स्तर 2.9 बताया गया, जबकि कुछ ही समय बाद वही स्तर 3.6 हो गया। स्वतंत्र जांच के लिए जब उन्होंने ब्लड सैंपल मांगा, तो प्रशासन ने 10 घंटे की देरी की, ताकि बाहरी लैब में जांच न हो सके।

इतना ही नहीं, अस्पताल के माहौल को उन्होंने किसी जेल से कम नहीं बताया। कमरे के अंदर और बाहर पुलिस की तैनाती, कांच के दरवाजों से लगातार निगरानी और निजी डॉक्टरों को मिलने न देने के व्यवहार ने सोनम के स्वास्थ्य पर विपरीत असर डाला है। इसी तनाव के कारण उनका ब्लड प्रेशर 110/70 से बढ़कर 125/85 हो गया है।

लोकतंत्र के लिए चिंताजनक स्थिति

डॉ. आंग्मो ने जोर देकर कहा कि प्रशासन के पास उन्हें वहां रोकने का कोई लिखित आदेश नहीं है। यह एक ‘अनसेड इल्लीगल डिटेंशन’ है। एक स्वतंत्र नागरिक को अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने का अधिकार न मिलना लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा यह तय किया जाना कि इलाज कहां होगा, नागरिकों के मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।

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