Haryana News: हरियाणा के रेवाड़ी से देश को गौरवान्वित करने वाली एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है। रेवाड़ी पुलिस लाइन की रहने वाली 48 वर्षीय आशा झांझड़िया ने पर्वतारोहण के क्षेत्र में शानदार उपलब्धि हासिल की है। अपनी मजबूत इच्छाशक्ति, साहस और जुनून के दम पर उन्होंने कुछ ही दिनों के अंतराल में यूरोप और अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटियों पर तिरंगा फहराया। उनकी इस उपलब्धि ने रेवाड़ी के साथ-साथ पूरे हरियाणा और देश का नाम रोशन किया है।
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माउंट एल्ब्रुस पर सबसे पहले फहराया तिरंगा
आशा झांझड़िया ने अपने अभियान के दौरान सबसे पहले यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस को फतह किया। 21 अगस्त को सुबह 9:07 बजे उन्होंने समुद्र तल से 5,642 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस चोटी पर सफलतापूर्वक पहुंचकर भारतीय तिरंगा फहराया। कठिन मौसम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य को पूरा किया।
इसके बाद उन्होंने अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो की उहुरू पीक का रुख किया। 29 अगस्त को सुबह 5:31 बजे उन्होंने 5,895 मीटर ऊंची इस चोटी पर भी सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी की और वहां तिरंगा लहराया। दोनों चोटियों की सफलता ने उनके पर्वतारोहण अभियान को खास बना दिया।
‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का दिया संदेश
आशा ने अपनी इस उपलब्धि को केवल व्यक्तिगत कामयाबी नहीं माना। उन्होंने दुनिया की इन ऊंची चोटियों से ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ और महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया। उनका यह प्रयास बताता है कि अगर इंसान अपने लक्ष्य को लेकर दृढ़ रहे, तो उम्र और पारिवारिक जिम्मेदारियां भी उसके सपनों की राह में बाधा नहीं बन सकतीं।
परिवार और नौकरी के साथ जारी रखा जुनून
आशा झांझड़िया की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने पर्वतारोहण के साथ अपनी पारिवारिक और पेशेवर जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभाया। उनके पति अजय ताखर हरियाणा पुलिस में सब-इंस्पेक्टर हैं। उनकी बेटी डॉक्टर और बेटा इंजीनियर हैं।
आशा खुद पिछले 27 वर्षों से राजस्थान सरकार में नर्सिंग ऑफिसर के रूप में सेवाएं दे रही हैं। सरकारी नौकरी, परिवार और पर्वतारोहण जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में संतुलन बनाकर उन्होंने अपनी मेहनत और समर्पण की मिसाल पेश की है।
पहले भी एवरेस्ट पर फहरा चुकी हैं तिरंगा
आशा के नाम यह पहली बड़ी उपलब्धि नहीं है। वर्ष 2017 में 39 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में चीन-तिब्बत की ओर से दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट का सफल आरोहण किया था।
वह खेलों में भी सक्रिय हैं और एयर पिस्टल शूटिंग में हिस्सा लेती हैं। वर्ष 2025 में मास्टर्स महिला वर्ग की प्रतियोगिताओं में उन्होंने चार स्वर्ण और तीन कांस्य पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया था।
अब ‘सेवन समिट्स मिशन 2026-27’ अगला लक्ष्य
एवरेस्ट, एल्ब्रुस और किलिमंजारो जैसी चोटियों को फतह करने के बाद आशा अब एक और बड़े लक्ष्य की तैयारी में हैं। उनका लक्ष्य ‘सेवन समिट्स मिशन 2026-27’ पूरा करना है। इसके तहत वह दुनिया के सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर भारतीय तिरंगा फहराना चाहती हैं।
आशा झांझड़िया की उपलब्धि हरियाणा ही नहीं, बल्कि देश की उन तमाम महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपनी उम्र या जिम्मेदारियों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं।
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