Haryana News: स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) के क्षेत्र में भारत एक युगांतकारी छलांग लगाने के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रेन का शुभारंभ करेंगे, जो न केवल भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण का प्रतीक बनेगी बल्कि देश में ग्रीन हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव भी रखेगी। इस बड़े बदलाव के बीच हरियाणा राज्य अपनी नीतिगत दूरदर्शिता, औद्योगिक प्रोत्साहन और विनिर्माण क्षमता के बल पर देश में ग्रीन हाइड्रोजन का सबसे बड़ा औद्योगिक हब बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
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वर्ष 2030 तक 2.5 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य
भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए हरियाणा सरकार के ऊर्जा विभाग के अंतर्गत कार्यरत ‘हरियाणा अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण’ (HAREDA) ने एक समर्पित ग्रीन हाइड्रोजन नीति का मसौदा तैयार कर इसे सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी कर दिया है।
उत्पादन और विनिर्माण का रोडमैप: इस प्रस्तावित नीति के तहत वर्ष 2030 तक राज्य में प्रतिवर्ष 250 किलो टन (2.5 लाख टन) ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है। इसके अलावा, राज्य में 2 गीगावाट क्षमता के इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण का बुनियादी ढांचा भी विकसित किया जाएगा।
बढ़ती मांग और सब्सिडी: अनुमान है कि 2030 तक हरियाणा में ग्रीन हाइड्रोजन की घरेलू मांग बढ़कर 300 किलो टन प्रतिवर्ष तक पहुंच जाएगी। इस मांग को पूरा करने और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार वित्तीय सहायता, सब्सिडी और टैक्स में बड़ी छूट देने की योजना बना रही है।
‘मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति-2026’ में बड़ा दांव: मिलेगा ‘थ्रस्ट’ दर्जा
हरियाणा सरकार ने अपनी नई और महत्वाकांक्षी ‘मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति-2026’ के तहत ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता देते हुए ‘थ्रस्ट सेक्टर’ (Thrust Sector) में शामिल किया है। थ्रस्ट सेक्टर में उन भविष्यवादी उद्योगों को रखा गया है जो राज्य के आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं।
अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन की घोषणा
इस नीति के तहत ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण, फ्यूल सेल, हाइड्रोजन भंडारण, परिवहन उपकरण और अन्य सहायक उद्योगों में निवेश करने वाली इकाइयों को पूंजीगत अनुदान (Capital Subsidy) पर अतिरिक्त 5 प्रतिशत का टॉप-अप प्रोत्साहन (Incentive) दिया जाएगा। सरकार का यह कदम राज्य को स्वच्छ ऊर्जा आधारित विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने की रणनीति का अहम हिस्सा है।
पानीपत में स्थापित हो रहा है मेगा प्लांट
हरियाणा सरकार की नीतियां केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जमीन पर भी बड़े प्रोजेक्ट्स ने आकार लेना शुरू कर दिया है। पानीपत में एलएंडटी एनर्जी ग्रीनटेक द्वारा इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) की रिफाइनरी के लिए 10,000 टन प्रतिवर्ष क्षमता का एक विशाल ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र स्थापित किया जा रहा है।
यह परियोजना अगले 25 वर्षों तक पानीपत रिफाइनरी को स्वच्छ ईंधन की आपूर्ति करेगी, जिससे वर्तमान में इस्तेमाल होने वाले जीवाश्म ईंधन का विकल्प तैयार होगा और रिफाइनरी के कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी। इसे भारत की सबसे बड़ी औद्योगिक ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है, जो केंद्र सरकार के ‘राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ को सीधी मजबूती प्रदान करेगी।
रणनीतिक भौगोलिक स्थिति और उद्योगों को मिलेगा नया आयाम
विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में हरियाणा को अपनी भौगोलिक स्थिति का जबरदस्त स्वाभाविक लाभ (Strategic Advantage) मिल रहा है। दिल्ली-एनसीआर से निकटता, मजबूत सड़क एवं रेल नेटवर्क और पानीपत, गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार व यमुनानगर जैसे पहले से स्थापित मजबूत औद्योगिक गलियारे राज्य के पक्ष में काम कर रहे हैं।
हरियाणा में रिफाइनरी, ऑटोमोबाइल, स्टील और केमिकल जैसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता उद्योगों की भारी उपस्थिति के कारण यहां ग्रीन हाइड्रोजन की मांग और बाजार हमेशा उपलब्ध रहेगा। इससे न केवल मुख्य ऊर्जा संयंत्रों, बल्कि लॉजिस्टिक्स, पाइपलाइन और इंजीनियरिंग सेवाओं से जुड़े अनेक सहायक उद्योगों (Ancillary Industries) का भी तेजी से विकास होगा, जिससे आने वाले समय में राज्य के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर नए और उच्च तकनीकी रोजगार के अवसरों का सृजन होगा।
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