Haryana News: हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के शाहाबाद स्थित मीरी-पीरी मेडिकल संस्थान के प्रबंधन और नियंत्रण को लेकर विवाद एक बार फिर गंभीर होता नजर आ रहा है। संस्थान पर अधिकार को लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (HSGPC) के बीच टकराव की आशंका बढ़ गई है। स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए संस्थान परिसर तथा आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
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SGPC अध्यक्ष हरजिंद्र सिंह धामी पहुंचे संस्थान
विवाद के बीच SGPC और संस्थान ट्रस्ट के चेयरमैन एडवोकेट हरजिंद्र सिंह धामी शाहाबाद स्थित मीरी-पीरी मेडिकल संस्थान पहुंचे। उनके साथ संस्थान के अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे। धामी ने परिसर का निरीक्षण कर मौजूदा स्थिति की जानकारी ली और इसके बाद संस्थान के बोर्ड सदस्यों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। माना जा रहा है कि बैठक में संस्थान के प्रबंधन, प्रशासन और आगे की रणनीति को लेकर चर्चा हो सकती है। बैठक में लिए जाने वाले फैसलों को लेकर क्षेत्र में भी काफी चर्चा है।
HSGPC ने भी बुलाई कार्यकारिणी की बैठक
दूसरी ओर, हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (HSGPC) ने भी संस्थान परिसर में अपनी कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है। इसमें कमेटी के कई प्रमुख पदाधिकारियों और सदस्यों के शामिल होने की संभावना है। HSGPC अध्यक्ष जत्थेदार जगदीश सिंह झींडा के भी बैठक में पहुंचने की उम्मीद है। दोनों कमेटियों के शीर्ष नेतृत्व का एक ही समय में संस्थान परिसर में मौजूद होना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। संभावित टकराव को देखते हुए पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है और कानून-व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है।
हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है मामला
मीरी-पीरी मेडिकल संस्थान के प्रबंधन को लेकर विवाद केवल संस्थान परिसर तक सीमित नहीं है, बल्कि मामला अदालत तक भी पहुंच चुका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से इस मामले में हरियाणा कमेटी के पक्ष में फैसला दिया गया था।
इसी आदेश का हवाला देते हुए 27 जुलाई को HSGPC ने संस्थान के प्रबंधन को अपने अधीन होने का दावा किया था। हालांकि, SGPC ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की है, जिस पर शुरुआती सुनवाई हो चुकी है। इसके अलावा, हाईकोर्ट ने HSGPC की ओर से संस्थान के चिकित्सकों के लिए गठित किए गए नए बोर्ड पर फिलहाल रोक लगा दी है। ऐसे में कानूनी स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं।
कर्मचारियों के वेतन का मामला भी बना चिंता
प्रबंधन को लेकर जारी विवाद का असर संस्थान के डॉक्टरों और कर्मचारियों पर भी पड़ा है। बताया जा रहा है कि कर्मचारियों का पिछले चार महीने से वेतन लंबित था। इससे कर्मचारियों के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई थी। हालांकि, हाल ही में SGPC की ओर से कर्मचारियों को एक महीने का वेतन जारी किया गया है। अब दोनों कमेटियों की बैठकों में होने वाले फैसलों पर कर्मचारियों के साथ-साथ पूरे क्षेत्र की नजरें टिकी हैं।
फिलहाल प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और संस्थान के आसपास पुलिस बल की तैनाती की गई है। अधिकारियों की कोशिश है कि दोनों पक्षों की गतिविधियों के बीच किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति पैदा न हो और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनी रहे।
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