Haryana News: हरियाणा की माटी से एक और होनहार प्रतिभा ने वैश्विक मंच पर तिरंगे का मान बढ़ाया है। जींद जिले के जुलाना क्षेत्र के छोटे से गांव ‘देश खेड़ा’ के रहने वाले विकास लाठर ने गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित ‘अंतरराष्ट्रीय योग प्रतियोगिता 2026’ में स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीतकर पूरे देश का नाम रोशन किया है। योग की कठिन मुद्राओं और शारीरिक-मानसिक संतुलन के दम पर विकास ने दुनिया भर के प्रतिभागियों को पछाड़ते हुए यह उपलब्धि हासिल की है।
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अनुशासन और कड़ी तपस्या की मिसाल
विकास लाठर की यह सफलता किसी संयोग का परिणाम नहीं, बल्कि वर्षों की कठोर साधना का फल है। वर्तमान में विकास सोनीपत स्थित मोतीलाल नेहरू खेलकूद विद्यालय (राई स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी) में एक समर्पित योग शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। योग को उन्होंने केवल पेशे के रूप में नहीं, बल्कि जीवन जीने के एक आधार के रूप में अपनाया है।
अपनी व्यस्त दिनचर्या के बीच अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी करना आसान नहीं था, लेकिन विकास का संकल्प अटूट रहा। उनका मानना है कि योग केवल शरीर को लचीला बनाने की विद्या नहीं है, बल्कि यह वह शक्ति है जो व्यक्ति को कठिन से कठिन चुनौतियों से पार पाने का साहस और मानसिक एकाग्रता प्रदान करती है। अहमदाबाद में मिली यह जीत उनके इसी वर्षों पुराने अनुशासन और योग के प्रति अटूट निष्ठा का प्रमाण है।
जश्न में डूबा गांव ‘देश खेड़ा’
जैसे ही विकास के गोल्ड मेडल जीतने की खबर गांव देश खेड़ा पहुंची, गांव की गलियां खुशियों से झूम उठीं। स्थानीय निवासियों के लिए यह पल किसी उत्सव से कम नहीं था। ग्रामीणों ने बताया कि विकास की इस उपलब्धि ने पूरे गांव को गौरवान्वित किया है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि विकास की सादगी और उसकी कड़ी मेहनत आज के युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि हौसले बुलंद हों, तो विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई जा सकती है। घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है और परिजन गर्व के साथ मिठाइयां बांट रहे हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत
आज के दौर में जब युवा दिशाहीन हो रहे हैं, विकास लाठर की यह उपलब्धि एक नई राह दिखाती है। नशे और गलत संगत से दूर रहकर अपनी ऊर्जा को खेल और योग जैसे रचनात्मक कार्यों में लगाने का संदेश विकास की सफलता से स्पष्ट होता है। जुलाना क्षेत्र के स्थानीय युवाओं के लिए विकास अब एक रोल मॉडल बन चुके हैं। वे न केवल एक शिक्षक के रूप में छात्रों को योग सिखा रहे हैं, बल्कि अपने कर्मों से उन्हें सफलता के मार्ग पर चलने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं।
हरियाणा ने हमेशा से खेलों और अनुशासन में देश का नेतृत्व किया है, और विकास लाठर ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि हरियाणा की मिट्टी में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। विकास लाठर की यह स्वर्णमयी जीत न केवल उनके संघर्ष की कहानी है, बल्कि यह भारतीय योग संस्कृति की शक्ति का भी वैश्विक प्रदर्शन है। हम उनके उज्ज्वल भविष्य और योग के क्षेत्र में उनके और बड़े योगदान की कामना करते हैं।
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