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Haryana High Court का बड़ा आदेश, सरकारी कर्मचारियों के विदेश जाने का रास्ता साफ

हरियाणा सरकार के कर्मचारियों की विदेश यात्रा पर लगा पूर्ण प्रतिबंध पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है।

Haryana News

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

सितम्बर 1, 2026

Haryana News: हरियाणा सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों की विदेश यात्रा पर लगाया गया पूर्ण प्रतिबंध अब खत्म हो गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत कर्मचारियों के सितंबर 2026 तक विदेश जाने पर रोक लगाई गई थी। अदालत ने इस प्रतिबंध को मनमाना, असंगत और जरूरत से अधिक कठोर बताया।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति की विदेश यात्रा केवल यात्रा का विषय नहीं है, बल्कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से भी जुड़ी है। इसलिए किसी नागरिक को विदेश जाने से रोकने के लिए उचित और ठोस कारण होना जरूरी है। अदालत के मुताबिक, केवल सरकारी सेवा में होने के आधार पर कर्मचारियों के पूरे वर्ग पर एक जैसा प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है।

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नर्सिंग अधिकारी की याचिका से खुला मामला

यह मामला रोहतक स्थित पीजीआईएमएस में नर्सिंग अधिकारी के पद पर कार्यरत शीतल रानी की याचिका से जुड़ा था। उन्होंने 23 फरवरी 2021 को पीजीआईएमएस में अपनी सेवा शुरू की थी। अपने पेशेवर अनुभव और शैक्षणिक योग्यता को आगे बढ़ाने के लिए वह ऑस्ट्रेलिया में आयोजित होने वाली एक व्यावसायिक परीक्षा में शामिल होना चाहती थीं।

शीतल रानी को संबंधित पाठ्यक्रम में हिस्सा लेने और 29 सितंबर को आयोजित होने वाली परीक्षा में बैठने की अनुमति मिल चुकी थी। इसके बाद उन्होंने 18 अगस्त को अर्जित अवकाश के लिए आवेदन किया। हालांकि, 10 जून को जारी सरकारी निर्देशों का हवाला देते हुए उनके आवेदन पर विचार नहीं किया गया। सरकारी आदेश से प्रभावित होने के बाद शीतल रानी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने अदालत से ऑस्ट्रेलिया जाकर परीक्षा में शामिल होने के लिए अनुमति देने की मांग की।

सरकार ने वैश्विक संकट को बनाया आधार

हरियाणा सरकार ने अदालत में विदेश यात्रा पर प्रतिबंध लगाने के पीछे कई कारण बताए। सरकार की दलील थी कि रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण दुनिया भर में सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। खासतौर पर ईंधन और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता तथा कीमतों पर इसका असर पड़ा है।

सरकार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए ईंधन की बचत, संसाधनों का संरक्षण और सरकारी खर्च को नियंत्रित करने के लिए मितव्ययता के तहत विदेश यात्रा पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया था।

HC ने कहा- मौलिक अधिकार पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता

हाईकोर्ट ने सरकार की ओर से दिए गए तर्कों पर विचार करने के बावजूद पूरे सरकारी कर्मचारी वर्ग की विदेश यात्रा पर पूर्ण रोक को उचित नहीं माना। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक नीति या आर्थिक कारणों का हवाला देकर किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकार को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने सक्षम प्राधिकारी को शीतल रानी को ऑस्ट्रेलिया जाकर अपनी व्यावसायिक परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने के संबंध में उचित आदेश पारित करने का निर्देश दिया।

हाईकोर्ट के इस फैसले को सरकारी कर्मचारियों के व्यक्तिगत अधिकार और विदेश यात्रा की स्वतंत्रता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि सरकारी नीतियों के तहत लगाए जाने वाले प्रतिबंध संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों की कसौटी पर खरे उतरने चाहिए।

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